बहुत सारे विचारों से हम कनेक्ट नही कर पाते बहुत सारी चीजे मुझसे जुड़ नही पाती , बहुत सारे लोग मुझसे जुदा हो जाते हैं कारण क्या हैं ? तो इसका बड़ा ही सरल जबाब है
हम मोह माया से ऊपर उठ चुके है
बदला लेने की भावना और चुकाने की भावना अब खत्म सी हो गई है ।
मोह माया में फंसे हुए इंसान जीस तरह से सोचते हैं हम उनसे ऊपर उठ चुके है
न तो कोई उम्मीद है,
न कहीं जाना है,
न कोई लक्ष्य है,
न कोई ठिकाना है,
बस कर्तव्य करते जाना है,
कोई खुस होकर पुरुस्कार देने की कोशिश करता भी है तो कह देते हैं प्रभु कृष्ण के चरणों में समर्पित कर दे ,
न कुछ हासिल करना है
न कुछ साबित करना है,
बस कर्तव्य पथ पर चलते जाना है,
जीने के लिए बस थोड़ा बहुत रोटी मुझे मिल जाए
दरवाजे पर जो पथिक खड़ा है उसको भी दे पाएं ,
दुख सुख से बहुत दूर और एक मंजिल के मिलने के बाद अहंकार नही अपितु किसी दूसरी मंजिल की तलाश,
फिर से जीरो,
फिर से हीरो
यह परक्रिया चलती रहेगी,
जीवन भर कहीं भी रुकना नही है,
देहांत तक चलते रहना है
राधे राधे 










